Bawri Samaj – बावरी जाति क्या है, इतिहास, उत्पति, कुलदेवी – संपूर्ण जानकारी जानिए

बावरी समाज: दोस्तों आज हम बात करेंगे Bawri Samaj यानी कि बावरी जाति के बारे में। क्योंकि अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि बावरी समाज क्या है, Bavri Jati का इतिहास क्या है। बावरी जाति की उत्पत्ति कैसे हुई है। हम इन सभी प्रश्नों का उत्तर इस आर्टिकल में जानने वाले हैं।

 

बावरी जाति के बारे में(Bawri Samaj)

बावरी जाति भारत में पाई जाने वाली एक गरीब वर्ग की अनुसूचित जनजाति हैं। मुख्य रूप से बावरी जाति राजस्थान में अधिकतर पाई जाती हैं। बावरी जाति के लोग राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में भी रहते हैं। कई जगहों पर तो बावरी जाति के लोग बहुत ही गरीब हैं लेकिन कुछ स्थानों पर बावरी जाति के लोगों की गरीबी में सुधार आया है। बारी जाति के लोग अपनी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। इन लोगों की खास बात यह है कि यह अपनी कड़ी मेहनत, मजदूरी व मुश्किल भरे कार्य करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। बावरी समाज के बारे में विस्तार पूर्वक जानने के लिए आप इस लेख को आगे जरूर पढ़ें।

 
Bawri samaj बावरी जाति

बावरी समाज का इतिहास (Bawri samaj ka itihas)

बावरी जाति के इतिहास के बारे में दो बातें मुख्य रूप से प्रचलित है। बावरी समाज के इतिहास के बारे में पहली बात ये कही जाती है कि बावरी जाति के लोग राजपूत थे। कौम राजा के सिपहसलार थे। यह राजघराने से नहीं थे लेकिन राजपूत थे। उनका खुद का राजा था जहां पर ये राज किया करते थे। इसलिए कई जगहों पर बावरी को राजपूत भी कहा जाता है। बावरी जाति में कुछ अन्य उपजातियां भी आती हैं जिनके बारे में हम आगे इस लेख में बात करेंगे। पुरानी बुजुर्गों के द्वारा कहा जाता है कि पुराने समय में मुगलों ने हमारे भारत पर जब हमला किया था तो उस समय वे राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों पर हमला करने लगे थे। जब मुग़ल धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए तो 1 दिन वे बावरियों के राज्य के साथ युद्ध करने आए। लेकिन बावरी जाति के लोगों के सैनिकों ने उनके साथ डटकर मुकाबला किया। और यह भी कहा जाता है कि बावरी जाति के लोगों के पास ऐसी बावड़ी थी जिसमें कुछ अनहोनी मायावी शक्तियां थी जिससे ये अपनी बीमारी, घावों को उसके जल से ठीक कर लेते थे। तो युद्ध के समय जो बावरी जाति के लोग घायल होते थे तो उनको वे उस बावड़ी के पास लेकर जाते और वहां पर उस जल से उनके घावों को ठीक कर लेते थे। इस बात को मुगल समझ नहीं पाऐ और युद्ध में उनके सैनिक मरते गए। उसके बाद मुगलों ने सोचा कि यह मुट्ठी भर बावरी जाति के लोग युद्ध में  हमें कैसे हरा रहे हैं क्योंकि जिस सैनिक को चोट लग जाती है वह कुछ समय बाद वापस सही होकर युद्ध में लड़ने के लिए आ जाता है। उसके बाद मुगल पीछे हट गए और वह उस राज को जानना चाहते थे जो बावरी जाति की बावड़ी में था। उन्होंने अपने एक सैनिक को वेश बदलकर उनके नगर में भेजा कि तुम उस राज का पता करो जो बावरी जाति के लोगों के पास है। वो ऐसी कौन सी शक्ति है जो उन्हें इतनी ताकत दे रही है। वह सैनिक जैसे तैसे कर कर उस नगर में प्रवेश कर लेता है। लेकिन नगर के कुछ सैनिकों के द्वारा उसे पहचान लिया जाता है और उसे पकड़ने के लिए उसके दौड़ने लगते हैं। तभी वह मुगलों का सैनिक किसी एक घर में चला जाता है। और उस घर वालों को कुछ धन का लालच देकर उनसे छिपने की जगह मांगता है। जब सैनिक उस घर में आते हैं तो वह घर वाले बता देते हैं कि यहां पर कोई भी नहीं आया है। और वे सैनिक वापस चले जाते हैं। उस घर के लोग उस मुगल सैनिक को उस बावड़ी के बारे में सब कुछ बता देते हैं। तब मुगलों को पता चल जाता है कि उनके पास एक ऐसी बावड़ी है जिसमें मायावी शक्ति हैं। तो वे उस बावड़ी के अंदर कुछ ऐसा मिला देते हैं जिससे वह अपवित्र हो जाती हैं। उसके बाद उसमें सारी शक्तियां खत्म हो जाती हैं। फिर जब युद्ध होता है तो बावरी सैनिक मरने लगते हैं। लेकिन जब वह उस बावड़ी के पास जाते हैं तो उनके घाव ठीक नहीं होते हैं। उसके बाद बावरी अपनी जान बचाकर जंगलों में भाग जाते हैं और अपनी जिंदगी जीने लगते हैं। जिसके बाद कुछ बावरी गांवों और शहरों की तरफ चले गए और बावरी समाज के रूप में सामने उभर कर आए।

दूसरी तो यह है कि Bawari Jati के लोग प्राचीन समय में जंगलों में रहते थे और अपना पेट पालने के लिए शिकार किया करते थे। एक छोटी सी बावड़ी थी जहां पर भी रहते थे। जिनसे उनका नाम बावरी पड़ा। उसके बाद धीरे-धीरे यह शहरों एवं गांव की तरफ बढ़ने लगे। उसके बाद लोगों की वेशभूषा को देखकर, उनके तौर-तरीकों को देखकर उनके ही तरह अपने जीवन को चलाने लगे। धीरे-धीरे अपनी स्थिति में सुधार करते गए और एक बावरी समाज के रूप में प्रसिद्ध हो गए।

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FAQs –

बावरी समाज की कुलदेवी कौन है?

बावरी जाति की कुलदेवी उनकी मान्यताओं के अनुसार बावड़ी को माना गया है। वे अपने गोत्र के अनुसार अलग-अलग अपने देवी देवताओं की पूजा करते हैं।

बावरी का अर्थ क्या है? (Bawri)

बावरी का अर्थ बावड़ी से बना है। क्योंकि यह बावड़ी के पास रहते थे इसलिए इनका नाम बावरी पड़ा। यह वनबार में रहते थे। इसलिए इनका नाम बावरी पड़ा।

बावरी समाज का गोत्र (उपजाति) क्या है?

1. चौकीदार बावरी
2. विदावति बावरी
3. राज बोहरा बावरी

– चौहान – उप गोत्र
सनोवत, मनावत, नाथावत, देशवाल,…

– पवार – कोई उप गोत्र नहीं

– राठौड़ (धाधंल)

– सोलंकी

– भाटी

–  मकवाना

– डाबी

बावरी जाति के इतिहास की किताब कौन सी है?(Bauri caste history Book)

बावरी जाति के इतिहास के बारे में एक किताब लिखी गई है। जिसको आप ऑनलाइन खरीद सकते हैं। जिसका लिंक यह है – Click Here

बावरी जाति का पहनावा, वेशभूषा व भाषा क्या है?

बावरी जाति के कुछ लोग जाट समुदाय के लोगों की तरह पहनावा करते हैं। कुछ बावरी लोग पंजाबी पहनावा पहनते हैं। अब के समय में बावरी जाति के लोग सभी जातियों की तरह अच्छा पहनावा पहनते हैं। बावरी जाति की भाषा एक अलग तरीके की भाषा है जो हर कोई समझ नहीं सकता है।

बावरी जाति के त्यौहार व देवी-देवता कौन है?


बावरी जाति के लोग हिंदू हैं यह हिंदुओं की तरह ही सभी त्यौहार मनाते हैं। और हिंदू के सभी देवी देवताओं को मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं।

बावरी जाति क्या होती है?

बावरी जाती भारत में रहने वाली एक अनुसूचित जनजाति है। जो एक गरीब वर्ग के अंदर आती हैं। बावरी जाति SC कैटेगरी में आती है।

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